Executive Summary: This developing story brings key insights into the current global landscape. Here is a comprehensive look at the details.
तेजी से बदल रहा है बंगाल : अवधेश कुमार Updated: Fri, 12 Jun 2026 (16:08 IST) पश्चिम बंगाल में शुभेंदु अधिकारी सरकार द्वारा सत्ता संभालने के अल्पकाल में ही स्पष्ट बदलाव दिख रहा है। ऐसा लगता है कि केवल ममता सरकार की विचारधारा और दिशा के बिल्कुल उलट शुभेंदु सरकार ने यू टर्न ही नहीं किया बल्कि सारे कील कांटों को उखाड़ते, ध्वस्त करते तीव्र गति से शासन की गाड़ी वहां पहुंच रही है जहां से बंगाल शांत और स्थिर हो सामान्य राज्य के रूप में गतिविधियों का निर्धारण करे। शुभेंदु सरकार ने कुछ फैसले किए तथा कुछ प्रभाव में ही परिवर्तन आ गया। इनमें केवल केंद्रीय योजनाओं को लागू करना ही नहीं है। आप चाहे भाजपा के जितने आलोचक हों क्या किसी ने कल्पना की थी कि सरकार आने के हफ्ते भर के अंदर ही राज्य से टीएमसी द्वारा लगाए अवैध टोल बूथ हट जाएंगे, बैरिकेड समाप्त हो जाएंगे, हफ्ते वसूली का धंधा खत्म हो जाएगा…?
यह हो गया। ममता ने स्वयं महिलाओं की सुरक्षा के प्रति चिंता प्रकट करते हुए रात में न निकलने का आग्रह किया था। सरकार बदलते ही बंगाल अपने स्वभाव, संस्कृति और चहल-पहल में वापस दिख रहा है। महिलाएं देर रात आती-जाती दिखाई दे सकती है। सरकार ने महिलाओं की सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता दी है। कोलकाता समेत कई जिलों में रात की पुलिस पेट्रोलिंग काफी बढ़ा दी गई है। आम प्रतिक्रिया देख लीजिए सोशल मीडिया से लेकर मुख्य मीडिया में लोग लिख रहे हैं कि अब सरकार बदली है ऐसा महसूस हो रहा है। बकरीद के दिन वर्षों बाद सड़कों की बजाय मैदानों और मस्जिदों में नमाज पढ़े गए। किसी सरकार की दिशा का संकेत होता है और अगर वैचारिक और प्रशासनिक दिशा स्पष्ट हो, उनके प्रति प्रतिबद्धता और व्यवहार में प्रखरता हो तो उसका इकबाल कायम होता है। चुनाव परिणाम के तुरंत बाद ऐसा लग रहा था मानो बंगाल को संभालना कठिन होगा। कुछ ही दिनों में ऐसा लगने लगा मानो यह वो बंगाल है ही नहीं जिसे हम 4 मई के चुनाव परिणाम के पूर्व या उसके दो चार दिनों बाद तक देख रहे थे। कोलकाता से आसनसोल तक अवैध निर्माण के विरुद्ध बुलडोजर कार्रवाई का आक्रामक हिंसक विरोध पूर्व सरकार की तस्वीर पेश कर रहा था। पत्थरबाजी भी हुई। उसके बाद क्या हुआ यह महत्वपूर्ण है। फुटेज से पत्थरबाजों और दंगाइयों के चेहरे पहचान कर कार्रवाई हो रही है तथा पुलिस ने लाउडस्पीकर में ऐलान कर दिया कि जिन लोगों ने हिंसा और तोड़फोड़ की है उनकी संपत्ति से इसकी वसूली की जाएगी। उत्तर प्रदेश में योगी आदित्यनाथ सरकार ने हिंसक प्रदर्शनकारियों और दंगाइयों के विरुद्ध यही नियम अपनाया और उसके परिणाम काफी हद तक आए। बंगाल में इसकी कल्पना ही नहीं थी जो सामने है। भाजपा ने चुनाव अभियान में कानून और व्यवस्था कायम करने, महिला सुरक्षा, अवैध घुसपैठ रोकने, घुसपैठियों को बाहर निकालने, सीमा सुरक्षा एवं अंतरिक्ष सुरक्षा दोनों सुनिश्चित करने, तुष्टिकरण की समाप्ति एवं हिंदुओं के साथ हुए अन्याय का परिमार्जन, भ्रष्टाचार का अंत, प्रदेश को विकास एवं सांस्कृतिक गरिमा की पटरी पर वापस लाने आदि वायदे किए थे। मुख्यमंत्री का पदभार संभालते ही शुभेन्दु ने बांग्लादेश की सीमा पर घेराबंदी के लिए सीमा सुरक्षा बल को भूमि सौंपने का आदेश दिया जिसे 45 दिनों में पूरा हो जाना है। 450 किलोमीटर ऐसे क्षेत्र हैं जहां घेरा लगाना बाकी है उसकी जमीन मिली नहीं। मिनट में यह काम हो गया। इस दिशा में सबसे महत्वपूर्ण और बड़ा फैसला नेशनल हाईवे 10 और नेशनल हाईवे 110 के सात हिस्से केंद्र सरकार को सौंपना है। इनमें से पांच चिकन नेक या सिलीगुड़ी गलियारा से गुजरते हैं। चिकन नेक का 120 किलोमीटर इलाका पूर्वोत्तर के आठ राज्यों को भारत के साथ जमीन से जोड़ता है। यह बांग्लादेश, नेपाल, भूटान तीन देशों से लगता है और चीन भी यहां से निकट है। चिकन नेक कट जाए तो पूर्वोत्तर से भारत का सीधा जमीनी संपर्क खत्म हो जाएगा। दिल्ली दंगों के आरोपी सरजिल इमाम को उच्चतम न्यायालय ने आज तक जमानत इसीलिए नहीं दी कि उसने मुसलमानों के द्वारा चिकन नेट काट कर भारत को खंडित करने की बात की थी। संयोग से उस पूरे क्षेत्र में भारत के अंदर बंगाल और बिहार दोनों और मुसलमानों की आबादी राष्ट्रीय औसत से अधिक है तथा दूसरी और बांग्लादेश है। मुस्लिम आबादी को भड़का कर चिकन नेक काट कर शेष पूर्वोत्तर को भारत से अलग करने का विचार बांग्लादेश के पूर्व शासक मोहम्मद यूनुस से लेकर वहां जेन जी आंदोलन तथा जमात ए इस्लामी के नेताओं के सामने आए । ममता सरकार ने केंद्र के आग्रह को स्वीकार नहीं किया और इस कारण वहां रक्षा और नागरिक दोनों प्रकार के आधारभूत संरचनाओं की कमी रही। अवैध घुसपैठ के साथ अनेक भारत विरोधी गतिविधियां, अवैध पशुओं एवं सामग्रियों की तस्करी आदि को पूरी तरह रोक पाना कठिन था। नेशनल हाईवे अथॉरिटी ऑफ इंडिया तथा नेशनल हाईवे इंफ्रास्ट्रक्चर डेवलपमेंट कॉरपोरेशन लिमिटेड मिलकर इसका विकास करेगा। यानी आंतरिक और सीमा सुरक्षा और दूसरे रूप में कहें तो घुसपैठियों को रोकने के लिए सरकार ने पूर्ण प्रतिबद्धता दिखाई है। कट मनी और भ्रष्टाचार तथा महिलाओं के विरुद्ध अपराध की व्यापक छानबीन और कार्रवाई के लिए दो उच्च स्तरीय अधिकार प्राप्त आयोगों का गठन किया जा चुका है। सरकार ने आरजी कर मेडिकल कॉलेज के पूर्व सुपरिटेंडेंट संदीप घोष के खिलाफ वित्तीय धोखाधड़ी और मनी लॉन्ड्रिंग मामलों में ईडी को मुकदमा चलाने की मंजूरी दे दी है। ऐसे ही आदेश अन्य मामलों में दिए जा रहे हैं जिन्हें पूर्व सरकार ने रोक कर रखा था। आप जानते हैं कि संदेशखाली से लेकर आईजी कर और यहां तक कि मुर्शिदाबाद के दंगों में महिलाओं के साथ व्यवहार बंगाल में प्रमुख मुद्दा रहा है। कट मानी और भ्रष्टाचार का अनुभव ऐसा था मानो यह सरकारी प्रक्रिया का ही अंग हो। आप देख लीजिए वही पुलिस प्रशासन और माहौल कितना बदला है। अवैध कब्जों से मुक्ति बंगाल की ऐसी चुनौती है जिससे निपटना यानी इतिहास की धारा बदल देना होगा। एक पार्टी के लोगों का ही पूरे प्रदेश में कब्जा है। तृणमूल ने सत्ता में आते ही कांग्रेस और दूसरी पार्टियों के दफ्तरों व अन्य स्थान कब्जाये, इसके साथ नेताओं ने प्रशासन की मिली भगत से सरकारी व निजी जमीन, मकान सब पर भयानक रूप से कब्जे किए। माफिया तंत्र भूमि का उत्पन्न हुआ जिसने न जाने कितने लोगों को स्थान छोड़ने को विवश कर दिया। इसी तरह धर्म स्थलों पर कब्जे हुए या उन्हें जबरन बंद रखने को भी विवश किया गया। लगातार उन अवैध कब्जों के विरुद्ध कार्रवाई हो रही है। कांग्रेस और वामपंथी दलों तक के दफ्तर मुक्त कर भाजपा के लोगों ने कई जगह सौंप दिया। कुछ डर से ही छोड़ कर भाग गए। कई धर्मस्थल तो जनता ने हीं मुक्त करा लिए। वास्तव में शुभेंदु सरकार ने भाजपा की विचारधारा को सत्ता नीति में अपनाते हुए स्पष्ट संदेश दिया है। सड़कों पर नमाज पढ़ने का अंत करने के लिए लगातार कार्रवाई हो रही है। वंदे मातरम गायन अनिवार्य कर दिया गया। राज्य के इमामों, मुअज्जिनों और पुजारियों को दिया जाने वाला सरकारी भत्ता (मानदेय) 1 जून से समाप्त करने का आदेश जारी किया गया है। सरकार का एक बड़ा फैसला अन्य पिछड़ा वर्ग आरक्षण को 17% से घटाकर 7% करना तथा इसे केवल 66 हिंदू जातियों तक ही सीमित रखना है। पिछड़ी जाति की सूची में से मुसलमान की जातियों को पूरी तरह हटा दिया। ममता बनर्जी ने 2024 में 71 जातियों को पिछड़ी जाति में शामिल किया था जिनमें 65 मुस्लिम समुदाय के थे। ममता बनर्जी ने मुसलमानों को ज्यादा से ज्यादा पिछड़ी जाति का आरक्षण देने के लिए ही श्रेणी ए बनाकर 10% आरक्षण घोषित किया था। इसके पहले पिछड़े वर्ग के लिए 7% आरक्षण था। साफ था कि केवल वोट बैंक की दृष्टि से मुसलमानों को पिछड़ी जाति में शामिल कर अतिरिक्त आरक्षण का अनुपात लाया गया। इस तरह शुभेंदु सरकार ने कम समय में ही त्वरित गति से अपने कदमों द्वारा यह स्थापित कर दिया कि राज्य किसी मजहब या पंथ विशेष या पार्टी नेताओं या समर्थकों लिए नहीं बल्कि सबके हित में काम करेगा। खजाने का धन किसी पंथ के तुष्टिकरण के लिए नहीं बल्कि उपयुक्त पात्रों के कल्याण पर खर्च होगा, शासन कानून और विधान के अनुसार चलेगा, प्राथमिकता आंतरिक एवं बाह्य सुरक्षा तथा विकास होगा एवं पहले जो निहित स्वार्थी तत्व इसके रास्ते में आए, सत्ता का दुरुपयोग किया उन सबके विरुद्ध कानून के अनुसार कार्रवाई होगी। (इस लेख में व्यक्त विचार/विश्लेषण लेखक के निजी हैं। 'वेबदुनिया' इसकी कोई ज़िम्मेदारी नहीं लेती है।) लेखक के बारे में अवधेश कुमार स्वतंत्र पत्रकार....
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Conclusion: Stay tuned as we continue to monitor further updates and developments surrounding this story.